तंबाकू का सेवन करने वालों को दिल की बीमारियां होने का खतरा अधिकः डाॅ. अनुराग

रूडकी। हाल ही में लगाये गये एक अनुमान के मुताबिक, भारत में तंबाकू के सेवन से हर साल 4,49,844 लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। इससे होने वाली तमाम तरह की दिल की बीमारियों से मरने वाले लोगों की संख्या 16 प्रतिशत के करीब है। स्थिति इसलिए भी भयावह है क्योंकि 26.68 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तंबाकूू का सेवन करते हैं और इससे कहीं ज्यादा लोग सेकंड-हैंड स्मोकिंग का शिकार होते हैं, यानि ऐसे लोग जो दूसरों की स्मोकिंग से निकले धुएं की वजह से बीमार होते हैं।
इस बारे में बताते हुए डाॅ. अनुराग रावत एसोसिएटेड प्रोफेसर एवं कंसल्टेंट कार्डियोलाॅजिस्ट, एचआईएचटी यूनिवर्सिटी एंड हाॅस्पिटल देहरादून ने कहा कि ‘‘किसी भी रूप में तंबाकू का नियमित सेवन ट्रिगलीसेराइड्स की मात्रा बढ़ा सकता है और हाई-डंेंसिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को घटा देता है। यह खून को चिपचिपा और खून के जमने की आशंका को भी बढ़ा देता है, जिससे दिमाग और दिल में खून का बहाव प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ जाती है। तंबाकू से ब्लड वेसल्स में इकट्ठा होने वाले सेल्स के क्षतिग्रस्त होने का भी खतरा रहता है। ऐसे में वल््र्ड हार्ट डे के मौके पर तंबाकू के सेवन से स्वास्थ्य को होने वाली समस्याओं के बारे में जागरूकता फैलाने की जरूरत है। बहरहाल, तंबाकू का सेवन छोड़ देना एक बार में पूरी होने वाली प्रक्रिया नहीं है और इससे प्रभावित व्यक्ति के साथ साथ उनके करीबियों को भी इसके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है और इसके लिए काफी वक्त देना पड़ता है। तंबाकू का सेवन छोड़ने का असर कुछ ही घंटों में दिखने लगता है और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा अगले कुछ साल में लगभग समाप्त हो जाता है।‘‘
भारत में तंबाकू की आदत छुड़वाने की राह में आने वाली सबसे बड़ी दिक्कत है मरीज की तंबाकू पर अत्यधिक निर्भरता। इसके अलावा आसपास का माहौल और इसका इस्तेमाल करने वाले शख्स की दिमागी अवस्था भी काफी मायने रखती है। तंबाकू पर पाबंदी की नीति के अलावा शैक्षणिक स्तर पर भी लोगों को इसके नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूक बनाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
डॉ. रावत ने कहा, ‘‘स्मोकिंग छोड़ देने के एक दिन के अंदर ही दिल के धड़कनों की गति कम हो जाती है, रक्त वाहिनियों से कार्बन मोनोऑक्साइड निकल जाता है और खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है। स्मोकिंग छोड़ने के एक साल के भीतर हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है। दो से छह साल के भीतर दिल की बीमारियों के होने का खतरा एक नॉन-स्मोकर के समान हो जाता है। कार्डियोलाॅजिस्ट होने के नाते हमें मरीजों को इस आदत को छोड़ने के लिए प्रेरित करना पड़ता है और उन्हें इससे जुड़ी समस्याओं के बारे में बार बार बताना पडता है।‘‘

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